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कश्मीर में हिंसा के लिए अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई और कुछ अन्य विदेशी संस्थाओं से हवाला के जरिये हर साल 1000
करोड़ रुपये की फंडिंग होती है। अलगाववादी इस धनराशि का उपयोग पत्थरबाजों की दिहाड़ी में करते हैं। आतंकी संगठनों को हमलों के लिए फिदायीन दस्ते तैयार करने और कश्मीरी युवकों को संगठन में भर्ती करने के लिए फंडिंग हो
रही है। कश्मीर में हवाला के जरिये धनराशि आने के बाबत तीन साल में 16 मामले दर्ज हुए हैं।
रही है। कश्मीर में हवाला के जरिये धनराशि आने के बाबत तीन साल में 16 मामले दर्ज हुए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने 30 नवंबर,
2016 को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वीकार किया है कि सूचनाएं इंगित करती हैं कि कश्मीर में प्रदर्शनकारियों को उकसाने के लिए घाटी में विद्रोही तत्वों को हवाला चैनलों के माध्यम से अवैध धन भेजा जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक हवाला के जरिये धन हासिल करने के मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हिंसा के दौरान लगभग 100 करोड़ रुपये कश्मीर घाटी में हवाला के जरिये उपद्रवियों तक पहुंचाए गए। नोटबंदी के समय घाटी में हवाला के लगभग 2000 करोड़ रुपये सर्कुलेशन में थे।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हिंसा के दौरान लगभग 100 करोड़ रुपये कश्मीर घाटी में हवाला के जरिये उपद्रवियों तक पहुंचाए गए। नोटबंदी के समय घाटी में हवाला के लगभग 2000 करोड़ रुपये सर्कुलेशन में थे।
इस राशि के बेकार हो जाने के बाद अलगाववादियों की कमर टूट गई। इस कारण दो महीने तक पत्थरबाजी की घटनाएं बहुत कम हो गईं, लेकिन नोटबंदी के दो महीने के बाद हवाला के जरिये फंड का आना फिर शुरू हो गया। इस कारण हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाएं फिर से बढ़ गईं। इस साल घाटी में अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये हवाला के जरिये अलगाववादियों और उपद्रवियों तक पहुंचे। हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा को मिली राशि इसमें शामिल नहीं है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई हवाला के जरिये धनराशि भेजने में हिजबुल मुजाहिदीन और जमात उद दावा के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। अलगाववादियों का ताल्लुक आर्गेनाइजेशन आफ इस्लामिक कंट्रीज से भी है। एजेंसियों के पास इनपुट हैं कि फंडिंग में इस चैनल का भी इस्तेमाल हो रहा है।
अधिकांश फंड पाकिस्तान और सऊदी अरब से आता है, जिसे पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और कोलकाता के कुछ हवाला कारोबारियों के जरिये घाटी तक पहुंचाया जाता है। फंडिंग का कुछ हिस्सा अलगाववादियों के विदेशी एकाउंट में अमेरिकी डालर के रूप में जमा होते हैं। बाकी नकद राशि के रूप में कश्मीर आता रहा है। इसमें 30 प्रतिशत जाली करंसी भी आती रही है।
जम्मू कश्मीर पुलिस के रिटायर्ड डीजीपी एमएम खजूरिया का कहना है कि पाकिस्तानी फंडिंग आतंकवाद के लिए आक्सीजन का काम करती रही है। फंडिंग के कई स्रोत हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को इसके बारे में पता है, लेकिन अब तक इसे इग्नोर किया जाता रहा है। पहले काठमांडू के जरिये फंड आता था। अब कई रास्ते खुल गए हैं।
कश्मीर में हिंसा के लिए अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई और कुछ अन्य विदेशी संस्थाओं से हवाला के जरिये हर साल 1000
करोड़ रुपये की फंडिंग होती है। अलगाववादी इस धनराशि का उपयोग पत्थरबाजों की दिहाड़ी में करते हैं। आतंकी संगठनों को हमलों के लिए फिदायीन दस्ते तैयार करने और कश्मीरी युवकों को संगठन में भर्ती करने के लिए फंडिंग हो रही है। कश्मीर में हवाला के जरिये धनराशि आने के बाबत तीन साल में 16 मामले दर्ज हुए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने 30 नवंबर,
2016 को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वीकार किया है कि सूचनाएं इंगित करती हैं कि कश्मीर में प्रदर्शनकारियों को उकसाने के लिए घाटी में विद्रोही तत्वों को हवाला चैनलों के माध्यम से अवैध धन भेजा जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक हवाला के जरिये धन हासिल करने के मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हिंसा के दौरान लगभग 100 करोड़ रुपये कश्मीर घाटी में हवाला के जरिये उपद्रवियों तक पहुंचाए गए। नोटबंदी के समय घाटी में हवाला के लगभग 2000
करोड़ रुपये सर्कुलेशन में थे।
