भोजपुरी कविताएँ-

भोजपुरी कविताएँ-
- डॉ रणधीर श्रीवास्तव 'धीर'
('मीठ भोजपुरिया' से संकलित)
(1)
'आई पुरवाई'
"आई पुरवाई लाई सुधि की बदरिया
बरसन लागे नयना, नेह की नगरिया।
आई पुरवाई लाई-

अँसुवा फुटन लागे, हिय दरकन लागे
छलकन लागी छवि,रूप की गगरिया,
आई पुरवाई लाई-
बिजुरी चमके लागे, घन बरसन लागे
छम-छम बाजे लागी, गाँव की पयलिया।
आई पुरवाई लाई-
जल बिच मछरी तड़पे अगिनि इव
पपिहा बजावन लागे दरदी बसुरिया।
आई पुरवाई लाई-
तड़पत जियरा करेजो करकन लागे
कुहुकत मोरवा सघन वन-बरिया
आई पुरवाई लाई-"
(2)
'झुमरी तलइया'
"चलअ चलीं पिया हम झुमरी तलइया
चलअ चलीं पिया हम झुमरी तलइया।
झुमरी तलइया में झुमका बिकत है
देता बेसाह त हम लेतीं बलइया। चल
झुमरी तलइया क बीच बजरिया
देखत लोगवा, न पकड़अ कलइया। चल
सासु मोरी देखे ननद मुसकाए
मोका ताड़ि देवरा करे ला खिंचइया। चल"
(3)
'पियासी धरती'
"आइल सावन मेघा पानी द पियासी धरती
देखअ अँखिया उठाय के पुकारे धरती।
हरवा दुआरे सूखे धनिया बखरिया,
खेतवा क हिया फाटे दरके पोखरिया।
आग लागी धरती पे,धुँअना अकसवा,
असवा जरन लागे लउके बिनसवा।
हाथ जोड़ लोगवा इनर से करे बिनती
आइल सावन मेघा पानी द पियासी धरती।"