"आई पुरवाई लाई सुधि की बदरिया
बरसन लागे नयना, नेह की नगरिया।
आई पुरवाई लाई-
बरसन लागे नयना, नेह की नगरिया।
आई पुरवाई लाई-
बिजुरी चमके लागे, घन बरसन लागे
छम-छम बाजे लागी, गाँव की पयलिया।
आई पुरवाई लाई-
छम-छम बाजे लागी, गाँव की पयलिया।
आई पुरवाई लाई-
जल बिच मछरी तड़पे अगिनि इव
पपिहा बजावन लागे दरदी बसुरिया।
आई पुरवाई लाई-
पपिहा बजावन लागे दरदी बसुरिया।
आई पुरवाई लाई-
तड़पत जियरा करेजो करकन लागे
कुहुकत मोरवा सघन वन-बरिया
आई पुरवाई लाई-"
कुहुकत मोरवा सघन वन-बरिया
आई पुरवाई लाई-"
(2)
'झुमरी तलइया'
'झुमरी तलइया'
"चलअ चलीं पिया हम झुमरी तलइया
चलअ चलीं पिया हम झुमरी तलइया।
चलअ चलीं पिया हम झुमरी तलइया।
झुमरी तलइया में झुमका बिकत है
देता बेसाह त हम लेतीं बलइया। चल
देता बेसाह त हम लेतीं बलइया। चल
झुमरी तलइया क बीच बजरिया
देखत लोगवा, न पकड़अ कलइया। चल
देखत लोगवा, न पकड़अ कलइया। चल
सासु मोरी देखे ननद मुसकाए
मोका ताड़ि देवरा करे ला खिंचइया। चल"
मोका ताड़ि देवरा करे ला खिंचइया। चल"
(3)
'पियासी धरती'
'पियासी धरती'
"आइल सावन मेघा पानी द पियासी धरती
देखअ अँखिया उठाय के पुकारे धरती।
हरवा दुआरे सूखे धनिया बखरिया,
खेतवा क हिया फाटे दरके पोखरिया।
आग लागी धरती पे,धुँअना अकसवा,
असवा जरन लागे लउके बिनसवा।
हाथ जोड़ लोगवा इनर से करे बिनती
आइल सावन मेघा पानी द पियासी धरती।"
देखअ अँखिया उठाय के पुकारे धरती।
हरवा दुआरे सूखे धनिया बखरिया,
खेतवा क हिया फाटे दरके पोखरिया।
आग लागी धरती पे,धुँअना अकसवा,
असवा जरन लागे लउके बिनसवा।
हाथ जोड़ लोगवा इनर से करे बिनती
आइल सावन मेघा पानी द पियासी धरती।"
