ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा।


ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा। इससे स्मारक के अंदर होने वाली हर हरकत पर नजर रखी जा सकेगी। ताज की स्थाई
ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा। इससे स्मारक के अंदर होने वाली हर हरकत पर नजर रखी जा सकेगी। ताज की स्थाई सुरक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया चुका है। अब जिला पुलिस इसका खाका तैयार करने में जुटी है।
सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील विश्वदाय स्मारक ताज के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, परंतु इसके बाद भी और पुख्ता निगरानी की जरूरत समय-समय पर जताई जाती रही है। छह जून को ताज की स्थाई सुरक्षा समिति की बैठक में पुख्ता निगरानी के लिए स्मारक को जीपीएस सिस्टम से जोड़ने का सुझाव दिया गया था। इस पर प्रदेश के एडीएजी सुरक्षा ने भी सहमति जता दी थी। जीपीएस से जुड़ने के बाद पूरे ताज परिसर की आसानी से निगरानी की जा सकेगी। स्मारक के किस हिस्से में कौन क्या कर रहा है? सब नजर आ जाएगा। एसएसपी एससी वाजपेयी ने इसका जिम्मा एसओ पर्यटन थाना सुशांत गौड़ को सौंपा है। गौड़ ने बताया कि ताज परिसर को जीपीएस से जोड़ने के लिए विशेषज्ञों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही इसकी रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
बैठक में ताज की उत्तरी और दक्षिणी मीनार पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय हुआ था, जिससे यमुना पार और संरक्षित स्मारक मेहताब बाग की ओर निगाह रखी जा सके। परंतु एएसआइ से विचार-विमर्श के बाद अब मुख्य मकबरे के दायीं ओर बने मेहमानखाने व बांयी ओर स्थित मस्जिद की बुर्जियों पर कैमरे लगाए गए हैं।
तीसरी आंख भी हुई पुख्ता
स्मारक के अंदर निगरानी को 19 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, परंतु सीआइएसएफ नियंत्रण कक्ष में लगे मॉनीटर्स पर इनकी तस्वीर स्पष्ट नजर नहीं आती थी। बैठक में नये कैमरे और मॉनीटर लगाने का निर्णय हुआ था। अब पुराने कैमरों को हटाकर 19 नये अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जबकि नियंत्रण कक्ष में भी छह नये एलसीडी मॉनीटर लगाए गए हैं।