अक्सर हम ये पढ़ते आये हैं कि भारत एक ऐसा देश है, जहां अलग-अलग धर्म, जाति और सम्प्रदाय के लोग मिलकर रहते हैं और ऐसा है भी। पर आज के समय में जिस तरह का माहौल देश में बनाया जा रहा है वो चिंता का विषय है। वोटों की राजनीति में लोग देश को भूलते जा रहे हैं। साथ ही संस्कृति और देश की सुरक्षा के साथ भी खतरनाक खेल खेला जा रहा है।
आज के समय में कांग्रेस जिस तरह का हथकंडा अपना रही है, वो देश को धरातल से रसातल की ओर ले जा रहा है।विपक्ष का मतलब होता है कि आप सत्तारूढ़ पार्टी का विरोध करें, लेकिन देश की एकता और अखंडता को ताक पर रखकर नहीं। गलती सिर्फ राजनीतिक पार्टियों की नहीं है, इसमें जनता भी दोषी है जो आज पढ़ी लिखी होते हुए भी धर्म और जाति के नाम पर लड़ने मरने को तैयार हो जाती है।
इसका हाल ही में एक उदाहरण उत्तर प्रदेश में भीम सेना के रूप में देखने को मिला। सच्चाई तो यह है कि आज देश में आरक्षण की उतनी जरूरत नहीं है, जितनी होनी चाहिए थी पहले। फिर भी लोग आज भी उसी ज़िन्दगी में जीना चाहते हैं। एक दूसरे को विदेशी बताने से देश का विकास नहीं होगा और ना ही उन लोगों का जो जाति के नाम पर तलवार और डंडे उठा लेते हैं।
इतना ही कहना चाहूंगा कि ये राजनीतिक पार्टियां आपको रोटी और कपड़ा सिर्फ अपने फायदे तक ही दे सकती हैं। समय है खुद को बदलने का और जात-पात से ऊपर उठने का। तभी देश को इस सब नेताओं से बचाया जा सकता है।