अभिव्यक्ति की आजादी आखिर किस हद तक?

मित्रो आजकल आज सभी सभी सोशल साइट व न्यूज चैनलो मे अभिव्यक्ति की आजादी से सम्बन्धित तमाम बाते सुन रहे होगें व अभिव्यक्ति की आजादी का गलत प्रयोग का भी संज्ञान ले रहे होगे। मैने कुछ बडे नेताओ जैसे कांग्रेस के युवराज श्री राहुल गॉधी जी को भारत के प्रधानमंत्री को चोर बोलते सुना, कांग्रेस के प्रवक्ता श्री अखिलेश सिह को प्रधानमंत्री के लिए मादरणीय शब्द का प्रयोग करते सुना, मैने कांग्रेस की एन्टोनियो माइनो (सोनिया गॉधी) को प्रधानमंत्री के लिए लाशो का सौदागर सुना, जम्मू काश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री को भारत के झण्डे को कंधा न देने के लिए कहते सुना, मैने भारत के प्रधानमंत्री के लिए काफी गन्दे शब्दो को अभिव्यक्ति की आजादी के तहत सुना, मैने भारत के सेंनानायक के लिए गली का गुण्डा शब्द भी सुना, मैने इसी अभिव्यक्ति की आजादी के तहत पाकिस्तान जिन्दाबाद अपने ही देश मे सुना, मैने 5 मिनट के लिए सेना व पुलिस हटाने पर हिन्दुओ के कत्लेआम करने की धमकी भी इसी अभिव्यक्ति के आधार पर सुना, मैने पाकिस्तान व ISIS के झण्डे को अपने देश के फहराते हुए लोगो को देखा, मैने नित्य सोशल साइट पर इसी अभिव्यक्ति की आजादी के आधार पर देश के प्रधानमंत्री को चोर, दलाल, सेना के प्रति इस्तेमाल की जाने वाली गाली, हिन्दुओ धर्म के देवी देवताओ के अपमान को भी सहा और न जाने क्या- क्या इसी अभिव्यक्ति के आधार पर सहा, किन्तु मै आपसे जानना चाहता हूॅ आपने भी देखा ये सब, पढा सोशल साईट पर, क्या आप को इस अभिव्यक्ति की आजादी के गलत प्रयोग पर घृणा नही होती, देश व देश के प्रधानमंत्री के विरूद्ध अमार्यादित शब्दो का प्रयोग आपका खून नही खौल जाता, क्या आपको नही लगता इस अभिव्यक्ति की आजादी का पुनरावलोकन आज के परिवेश मे जरूरी हो गया है?


मित्रों, भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री का पद भारतीय संघ के शासन प्रमुख का पद है। भारतीय संविधान के अनुसार, प्रधानमन्त्री केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद् का प्रमुख और राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का प्रमुख होता है और सरकार के कार्यों को लेकर संसद के प्रति जवाबदेह होता है। भारत की संसदीय राजनैतिक प्रणाली में राष्ट्रप्रमुख और शासनप्रमुख के पद को पूर्णतः विभक्त रखा गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद ७४ में स्पष्ट रूप से मंत्रिपरिषद की अध्यक्षता तथा संचालन हेतु प्रधानमन्त्री की उपस्थिति को आवश्यक माना गया है। मंत्रिपरिषद का प्रधान प्रवक्ता भी वही है। वह सत्तापक्ष के नाम से लड़ी जाने वाली संसदीय बहसों का नेतृत्व करता है। संसद मे मंत्रिपरिषद के पक्ष मे लड़ी जा रही किसी भी बहस मे वह भाग ले सकता है। मन्त्रीगण के मध्य समन्वय भी वही करता है। वह किसी भी मंत्रालय से कोई भी सूचना आवश्यकतानुसार मंगवा सकता है। प्रधानमन्त्री, लोकसभा में बहुमत-धारी दल का नेता होता है, और उसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा में बहुमत सिद्ध करने पर होती है। भारत का प्रधानमंत्री भारत की जनता (130 करोड की जनसंख्या) के एक तिहाई बहुमत से चुना हुआ भारत का प्रतिनिधि या भारत का प्रधान सेवक होता है। 

मित्रो, भारत की सम्पुर्ण जनता के मतो से एक तिहाई बहुमत से विजयी हुआ व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है साथ ही वह व्यक्ति के तौर पर चाहे जो हो किन्तु एक बार भारत की जनता ने उसे अपने एक तिहाई बहुमत से चुनकर प्रधानमंत्री को तौर पर चुन लिया तो वो भारत का सबसे सम्मानित व प्रतिश्ठित व्यक्ति होता है क्योकि वो भारत की जनता का मुखिया या भारत की जनता का प्रतिनिधि होता है, तो आप मुझे बताईये के भारत के प्रधानमंत्री के विरूद्ध अपषब्दो का प्रयोग, क्या भारत के जनता का अपमान नही, भारत के प्रधानमंत्री पर अमार्यादित टिप्पणी, भारत की जनता के विवेक व सम्मान पर चोट नही है? 

मित्रो, मै आपसे सवाल पूछता हूॅ के भारत के प्रधानमंत्री व सेना का अपमान आपका अपमान नही है, क्या आप इतनी तुच्छ मानसिकता के है के एक अयोग्य व्यक्ति को देष के सर्वोच्च पद को अपने मतों से बैठा दिया, क्या वाकई आपमे सोचने व समझने की तनिक भी षक्ति नही जो आपने एक ऐसे अयोग्य व्यक्ति को देष के प्रधान सेवक के पद पर बैठा दिया, क्या आप मे स्वयं का अच्छा या बुरा सोचने की समझ नही है?

मित्रो मै जानता हुॅ भारत की जनता व आप काफी सोच समझकर ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए देष के प्रधानमंत्री को चुने है किन्तु फिर वो क्या कारण है के मात्र चन्द मुटठी भर लोग आपके विवेक व समझ के कारण किये गये मताधिकार से चुने हुए प्रधानमंत्री को नीच, दलाल, चोर जैसे अमार्यादित षब्दो का प्रयोग कर लेते है? क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नही बनती के आप अपने सम्मान व समझ की रक्षा कर सके? 

मित्रो, कोई भी व्यक्ति चाहे वो मोदी ही क्यो न हो, जब आप ने अपने यानि देष की जनता के एक तिहाई मतो से चुनकर उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन लिया, तो ये आप की जिम्मेदारी है हॉ मै पुरी ईमानदारी व विवेक से कह रहा हू ये ये आप की जिम्मेदारी होती है के आप उस पद यानि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे हुए व्यक्ति के सम्मान की रक्षा हेतु स्वयं खडे हो, आखिर वो कोन है जो भारत की जनता के 130 करोड की समझ व विवेक से चुने गये प्रधानसेवक को गाली देते है, वस्तुतः वो प्रधानमंत्री को नही आपकी समझ व विवेक को गाली देते है, वो प्रधानमंत्री को दलाल, नीच, चोर, मादरणीय नही कहते वो तो आपकी समझ व सोच व विवेक को दलाली, नीचता, चोरी व मादरणीय वाली समझ, सोच व विवेक को कहते है, उस पर ये अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आपको अपंग, हॉ अपंग क्योकि आप उनका उचित विरोध भी नही कर पाते तो आपको विकलांग भी साबित कर देते है, क्या वाकई आपकी सोच समझ व विवेक इतनी गिरी हुई है के उसे ऐसे ही कोई ऐरा गैरा गाली देके चला जाये? क्या वाकई आप इतने अपंग या विकलांग है के आपकी सोच समझ व विवेक को कोई गाली देता है और आप मात्र उसका मुॅह देखते रह जाते है? क्या वाकई आप मे प्रतिकार की तनिक भी क्षमता नही अपने सम्मान की रक्षा हेतु? क्या देष की प्रधानमंत्री, सेना व सुप्रीमकोर्ट जैसे बडे संवैधानिक पदो व प्रतिश्ठानों की रक्षा के लिए आप मे तनिक भी पौरूश नही बचा? भारत माता यानि आपकी जन्मभूमि के लिए अपषब्दो का प्रयोग करने वाले का प्रतिकार करने की आपके अन्दर तनिक भी क्षमता नही ? 

हे भारत के वीर परषुराम, भगत सिह, चन्दषेखर आजाद, अब्दुल हमीद, पृथ्वीराज जैसे षुरवीरो की सन्तानो विचार करो, अभिव्यक्ति की आजादी आखिर किस हद तक?क्या मुॅह लेकर आप 15 अगस्त, 26 जनवरी, रामनवमी, दषहरा, गुरू प्रकाषोत्सव मनाते हो? तनिक भी लज्जा न आती जब मात्र चन्द मुटठी भर लोग आपको, आपके सम्मान को आपके सामने ही रौंद कर चले जाते है? अरे जिस भगत सिह आजाद, बिस्मिल ने तुम्हारे झंडे के लिए जान दे दी आखिर उसका अपमान तुम कैसे सहन कर लेते हो? कैसे भारत माता के जयकारे न लगाने वाले का बर्दास्त कर लेते हो? आखिर कैसे अब्दुल हमीद, कैप्टन बत्रा की सेना का अपमान सहन कर लेते हो? कैसे कोई तुम्हारे सोच समझ व विवेक से चुने गये प्रधानमंत्री के लिए अपषब्दो का अपमान कर लेता है? तुम्हारा खून तनिक भी न खौलता?